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मानसिक तनाव व निदान
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*मानसिक तनाव* -------------------------- *तनाव सिर्फ दिमाग में चलने वाला एहसास नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली जैविक प्रतिक्रिया है। जब इंसान लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर लगातार “अलर्ट मोड” में बना रहता है।* *मानसिक तनाव से शरीर में रासायनिक बदलाव* दिल की धड़कन तेज होने लगती है, मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं, पेट की प्रक्रिया बिगड़ सकती है और दिमाग धुंधला महसूस होने लगता है तनाव होते ही दिमाग इसे "खतरा" मान लेता है और शरीर में पूरा केमिकल अलार्म सिस्टम चालू हो जाता है। इसे Fight-or-Flight रिस्पॉन्स कहते हैं। *तुरंत होने वाले रासायनिक बदलाव - कुछ सेकंड में* 1. *एड्रेनालाईन नॉरएड्रेनालाईन* 2. - *कहां से*: एड्रिनल ग्रंथि से रिलीज - *असर*: दिल की धड़कन तेज, ब्लड प्रेशर बढ़ना, सांस तेज, मसल्स में खून भेजना, शुगर लेवल बढ़ाना - *मकसद*: तुरंत एनर्जी देना ताकि लड़ो या भागो 2. *कोर्टिसोल* - *कहां से*: एड्रिनल कॉर्टेक्स से, HPA एक्सिस एक्टिव होने पर ...
Kangen Water - cure to cancer
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🔬 *क्या कहता है विज्ञान? कैंसर की असली वजह और बचाव!* 🔬 नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक **डॉ. ओटो हेनरिक वारबर्ग (Dr. Otto Heinrich Warburg)** ने साबित किया था कि कैंसर वाले टिश्यूज हमेशा *एसिडिक (Acidic)* होते हैं, जबकि स्वस्थ टिश्यूज *एल्कलाइन (Alkaline)* होते हैं। इमेज के अनुसार, शरीर में दो मुख्य स्थितियों के कारण बीमारियाँ पनपती हैं: 1️⃣ **एसीडोसिस (Acidosis):** शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ना। 2️⃣ **हाइपोक्सिया (Hypoxia):** सेल्स में ऑक्सीजन की कमी होना। 💧 कैंगेन वॉटर (Kangen Water) कैसे करता है बचाव? कैंगेन वॉटर आपके शरीर का नेचुरल बैलेंस और हेल्थ रिस्टोर करने में मदद करता है: * *एल्कलाइन हाइड्रेशन:* एसिडिटी को न्यूट्रलाइज कर pH बैलेंस बनाए रखता है। * *ऑक्सीजन में सुधार:* सेल्स तक ऑक्सीजन की डिलीवरी को बेहतर बनाता है। * *इम्यून सिस्टम को सपोर्ट:* शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। * *ओवरऑल वेलनेस:* आपको रखता है ऊर्जवान और स्वस्थ। *"Balance your water, balance your body. Alkaline water is the foundation of good health."* अपने पानी को बदलिए और अप...
गांधी व गोडसे- जावेद अख्तर
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"... कहीं एक गांधी चल रहा है, कहीं एक गोडसे कत्ल के लिए खड़ा है... लेकिन गोडसे की गोलियां नहीं खत्म होती और गांधी की ज़िंदगी नहीं खत्म होती" जावेद अख्तर को सुनना मतलब अपनी बौद्धिकता के liberal पहलू को एक नया आयाम देना। यूट्यूब ने मुझे जावेद अख्तर की एक तकरीर का शॉर्ट परोसा। इस तकरीर में वे गांधी और गोडसे की तुलना विचारधारा के धरातल पर करते हैं। वे कहते हैं कि गोडसे की विचारधारा का समर्थन करने वाले दिग्गज राजनेताओं को ना चाहते हुए भी गांधी के आगे सर झुकाना पड़ता है। जावेद को पक्का यकीं है कि गॉडसेवादी कभी भी गांधी का कद छोटा नहीं कर पाएंगे। प्रस्तुत है जावेद की तकरीर का एक हिस्सा: "जब एक 80 साल का बूढ़ा एक मैदान पार कर रहा था, सहारा लेके लोगों का, और एक आदमी ने उस बूढ़े आदमी के कमजोर से जिस्म में तीन गोलियां उतार दीं। ये जो आदमी था इसको इस बूढ़े आदमी से नफरत थी क्या? क्या वो उसे मारना चाहता था? या कुछ और मारना चाहता था? उस ख्याल को, उस सोच को, उस ख्वाब को, उस उम्मीद को मारना चाहता थे जिसका नाम गांधी था? लेकिन अरमान और ख्वाब और उम्मीद, उसूल और सच्चाईयां गोलियों से नहीं मरते।...
मनुष्यता का बोध
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मनुष्यता का बोध ---------------------- ईश्वर ने तुमसे कभी कुछ नहीं मांगा। न व्रत,न होम,न फल,न फूल। उसने बस चाहा कि तुम वैसा ही बन जाओ, जैसे तुम मूलतः थें निर्मल, सरल, सहज, निर्दोष। ईश्वर किसी देवालय में नहीं रहता है वह तो हर व्यक्ति के मन के अंदर है। ईश्वर तो हवा, पानी, पेड़-पौधों और हर मनुष्य के भीतर मौजूद हैं। जब हम यह स्वीकार करते हैं कि सबमें एक ही ईश्वर का अंश है, तो हमारे मन में हर जीव के प्रति प्रेम, करुणा और सम्मान का भाव जागृत होता है। सिर्फ साँस लेना ही जीवन नहीं है बल्कि किसी और की साँस बन जाना ही असली जीवन है। वो जो स्वार्थ से ऊपर उठे जो “मैं” से आगे बढ़कर “हम” तक पहुँचे वही सच में इंसान है। मरना यहाँ केवल शरीर का अंत नहीं बल्कि अपने अहंकार छोड़ देना है अपने सुख त्याग देना है किसी और के दर्द को अपना मान लेना है। जब कोई किसी दूसरे के आँसू पोंछने के लिए अपने सुखों का त्याग करने को तत्पर हो जाता है वहीं इंसानियत जन्म लेती है। मनुष्य होने और मनुष्यता का बोध होने में अंतर है। मनुष्यता बोध होते ही वह यांत्रिक ...
नव वर्ष
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नए साल में नई पहल हो, कठिन जिंदगी .... सरल हो, नये संकल्प व नए पथ हो सुखद सबका ... नया साल हो, आगे बढ़ने के प्रयास सबके हर हाल में सदा ..... सफल हो, बिखरे आभा दिनकर की उत्साह उमंग के.... हर पल हो, विचार-कार्य-परिश्रम का आपके हाथ में ... प्रतिफल हो, समय से सब सधे, काज हो पूरे नव वर्ष में ऐसी .... हलचल हो, विश्व में कहीं भी न युद्ध हो वाणी हो मधुर ...नयन सजल हो, विवाद नहीं आपस मे संवाद हो, मानवता के सवाल सब.... हल हो, मानव मन मे करुणा का वास हो ईर्ष्या - द्वेष का नाश .... समूल हो, आपदा- घृणा रहित हो विश्व प्रेम-करुणा मन में ....सबल हो, नए साल में ऐसी नई पहल हो, कठिन जिंदगी .... सरल हो ।। ------------------------------------------- अशोक शिरोडे 31 दिसंबर 2025
सियासत का मैदान - नफरत का खेल
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*सियासत के मैदान में नफरत का खेल* ----------------*----------------- राजनीति का मूल मंत्र है सत्ता और सत्ता तक पहुँचने का सबसे छोटा व आसान रास्ता आज नफरत बन चुका है। जनता को जाती व धर्म के नाम विभाजित कर दो। उन्हें जीवन के मूलभूत सवालों पर सोचने और बात करने का मौका ही मत दो। जनता को जोड़ना मुश्किल है, लेकिन तोड़ना आसान है। इसलिए हर चुनाव से पहले एक नया दुश्मन गढ़ा जाता है। कभी मज़हब के नाम पर, कभी जाति के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर। नफरत का खेल सुनियोजित होता है। सोच समझकर योजनाबध्द रूप से इस षडयंत्र का जाल बुना जाता है। हर चुनाव के पहले एक डर पैदा किया जाता है। बताया जाता है कि फलां समुदाय तुम्हारी नौकरी खा जाएगा, तुम्हारी संस्कृति मिटा देगा, तुम्हारे बच्चों का भविष्य छीन लेगा। भावनात्मक तौर पर मन मे डर पैदा किया जाता है , डर के बाद गुस्सा आता है। गुस्से के बाद भीड़ बनती है। और भीड़ का कोई विवेक नहीं होता। उसकी कोई दिशा नहीं होती। भीड़ में एक उबाल आता है। नफरत के बहाव में भीड़ बह जाती है। इस बहाव के आवेश में बिना सोचे समझे बोलती है, वोट देती है , लड़ती ...
कविता - सामाजिक मूर्छा का दौर
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अजब बदला है राजनीति का मिजाज इस दौर में सच की आवाज कहीं खो गई मन की बात - जुमलों के शोर में धन दौलत की चोरी को सुनते थे वोट की चोरी होने लगी इस दौर में मदारी के तमाशे में सब हैं मगन कोई कुछ न बोले अंधभक्ति के दौर में राजा और रंक दोनों है अपने मे मस्त सामाजिक मूर्छा के इस विकट दौर में।। - अशोक शिरोडे -
🔺 पानी-शरीर -स्वास्थ🔺हमें कैसा पानी पीना चाहिए! - (डॉ.अशोक शिरोडे)
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🔺 पानी-शरीर -स्वास्थ🔺 हमें कैसा पानी पीना चाहिए! क्रमशः ...2 ----------------------------------- हमें पहाड़ो से निकलने वाली नदियों व झरनों के पानी के समान अशुद्धियों से मुक्त, एंटीऑक्सीडेंट युक्त पतला (सुक्ष्म) , इलेक्टरोलीसिस की प्रक्रिया से गुजरे हुआ पानी पीना चाहिए क्योंकि यह शरीर को हाइड्रेट रखता है, पाचन में मदद करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। पेयजल की गुणवत्ता के मानकों में रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन पानी शामिल है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित IS 10500:2012 मानक के अनुरूप होता है। हमारे पीने के पानी का pH 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए, गंदलापन कम होना चाहिए, और कुल घुलित ठोस (TDS) 300 mg/L से कम होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पानी में हानिकारक जीवाणु या रसायन नहीं होने चाहिए और उसमें घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित IS 10500:2012 पेयजल के लिए आधिकारिक भारतीय मानक है, जो भारत में पानी की गुणवत्ता को नियंत्रित करता ...
चंद्रग्रहण - एक खगोलीय घटना
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चंद्रग्रहण मात्र एक खगोलीय घटना है। ------------------------------------------- जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो वो खगोलीय घटना है..लेकिन हम इंसानों ने इसे धार्मिक तमाशा बना दिया गया है। चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, लेकिन इसके बारे में कई तरह के अंधविश्वास ( Myth) प्रचलित हैं. ग्रहण से जुड़ी ज्यादातर बातें सिर्फ़ परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं. विज्ञान के अनुसार, यह केवल सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की alignment है, जिसका इंसानी स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं या खाने-पीने पर कोई असर नहीं होता है. 🔹 हिंदू धर्म में कहा जाता है कि चंद्रग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए, गर्भवती महिलाएँ बाहर न निकलें, मंत्र-जाप करें..! 🔹 इस्लाम में इसे अल्लाह की निशानी माना गया और सलात-उल-खुसूफ़ (विशेष नमाज़) पढ़ने की परंपरा है..! 🔹 ईसाई धर्म में पहले इसे “ईश्वर का क्रोध” समझा जाता था पर अब वो इस मूर्खता से निकल गए हैं..! 🔹 बौद्ध/जैन परंपराओं में भी ग्रहण को साधना और तपस्या का समय माना जाता है..! लेकिन सच्चाई ये है कि..! न तो खाने में कुछ ज़हरीला हो जाता है..! न गर्भवती महिला और बच्चा खतर...
पानी-शरीर-स्वास्थ मानव शरीर में पानी की भूमिका(डॉ.अशोक शिरोडे)
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🔺 पानी - शरीर - स्वास्थ् 🔺 मानव शरीर में पानी की भूमिका ------------------------------------ जल ही जीवन है ऐसा कहा जाता है , लेकिन क्यों इस पर कभी गंभीरता से विचार नहीं करते है। एक व्यक्ति 1 सप्ताह तक भोजन के बिना रह सकता है, लेकिन पानी की एक बूंद के बिना 3 दिनों से अधिक नहीं रह सकता है। जैसे ही मानव शरीर में 1% पानी की कमी होती है, उसे प्यास लगने लगती है। 5 प्रतिशत तक की कमी होने पर शरीर की नसें और इसकी सहनशक्ति कम होने लगती है। जब ऐसा होता है, तो शरीर थकावट महसूस करता है। अगर शरीर में पानी का स्तर 10 प्रतिशत तक गिर जाता है, तो व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है। अगर शरीर में पानी की कमी 20 प्रतिशत तक हो जाती है, तो यह इंसान की मौत का कारण भी बन सकता है। यही कारण है कि मनुष्य को हमेशा अपने शरीर को पानी की आपूर्ति करनी चाहिए। अपने स्वास्थ्य में सुधार करना चाहते है तो यह समझना कि पानी आपके शरीर के लिए क्यों आवश्यक है, एक स्वस्थ, अधिक हाइड्रेटेड जीवन की ओर पहला कदम है। यह पोषक तत्वों और ऑक्सीजन को कोशिकाओं तक पहुँचाता है, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है, ...
परसाई की रचनाएं "सोचना" और "सवाल करना" सिखाती है (डॉ.अशोक शिरोडे)
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परसाई की रचनाएं "सोचना" और "सवाल करना" सिखाती है ------------------------------------------------- हरिशंकर परसाई का नाम हिंदी साहित्य में व्यंग्य के स्तंभ के रूप में लिया जाता है। उनके लिए 'लोक शिक्षा' का अर्थ केवल स्कूली पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं था, बल्कि यह एक सशक्तिकरण का हथियार था। हरिशंकर परसाई (1924-1995) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज की कुरीतियों, विसंगतियों और राजनीतिक - सामाजिक भ्रष्टाचार पर तीखे प्रहार किए। उनका मानना था कि सच्ची शिक्षा वह है जो आम जन (लोक) को उनके अधिकारों, सामाजिक विषमताओं और शोषण के तंत्र के प्रति जागरूक करे। उनका लेखन 'लोक शिक्षण' (जनशिक्षा) का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। उनकी रचनाओं ने न केवल पाठकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें सामाजिक सच्चाई से भी रूबरू कराया। लोक शिक्षा के प्रति विचार परसाई जी ने अपने लेखन को ही लोक शिक्षा का सबसे बड़ा माध्यम बनाया। उनकी रचनाएँ एक कक्षा की तरह हैं जहाँ पाठक समाज का यथार्थ पा...
गांधी - एक वैश्विक व्यक्ति
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गांधी - एक वैश्विक व्यक्ति –----------------------------- गांधी को पूरा विश्व जानता है और मानता है। एक व्यक्ति की अज्ञानता से विश्व अज्ञानी नहीं हो जाएगा। देश के सभी राज्यों में प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम में महात्मा गांधी को पढ़ाया जाता है। उच्चतर माध्यमिक में तो विस्तृत रूप से पढ़ाया जाता है। अनेक लोगों ने उनके विविध विचार व कार्यो पर शोध किये है, तथा जो आज भी जारी है। दुनिया के लगभग सभी देशों में गांधी की प्रतिमा लगी है, कोई न कोई संस्थान स्थापित किये गए हैं। गांधी के विचार व विस्तृत कार्य पर निरंतर शोध कार्य किया जाता है। आज भी अनेक विद्वान लोग गांधी को विस्तृत आयाम में नए दृष्टिकोण के साथ परिभाषित कर रहे हैं। इंग्लैंड जिसके शासन के खिलाफ गांधी ने उस दौर में एकदम नए प्रकार का शांतिमय विरोध आंदोलन असहयोग आंदोलन किए, उस देश ने भी गांधी के अस्तित्व को स्वीकार किया उनके वैचारिक व व्यवहारिक संघर्ष को सही ठहराते हुए पूरे सम्मान के साथ प्रतिमा स्थापित की है। अफ्रीका में गांधी के संघर्ष ने वहां लोगों को प्रेरित किया, गांधी के अहिंसा के पथ पर चलकर ही नेल...
ज्योतिष का आधार ही त्रुटिपूर्ण -
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ज्योतिष - आधार ही त्रुटिपूर्ण - डॉ. अशोक शिरोडे ---------------------------------- *प्रसिद्ध लेखक गुणाकर मूले की पुस्तक "ज्योतिष विकास प्रकार और ज्योतिर्विद"* आज के समसामयिक अंवधविश्वासी युग में मील का पत्थर है, जब हमें 21 वीं सदी में तार्किकता वैज्ञानिकता की ओर अग्रसर होना चाहिए तो अधिकांश मध्यवर्ग आज फलित ज्योतिष की घनघोर अंधविश्वास में आकंठ डूबा हुआ है! भारत ही नहीं अपितु विश्व के तमाम देशों का उच्च शिक्षित तबका और मध्य वर्ग फलित ज्योतिष और ज्योतिर्विदों के प्रभाव में है। गुणाकर मूले की यह किताब फलित ज्योतिष के पूरे फलसफे और सिद्धांत की पोल खोलती है और फलित ज्योतिष को एक सिरे से खारिज करते हुए इसे पूर्णतया अंधविश्वास पर आधारित छल बताती है। इसी विषय मेरे विचार- मैं ज्योतिष का विशेषज्ञ व्यक्ति नहीं हूं। ज्योतिष के विषय में सामान्य जानकारी रखता हूं। मेरी समझ से ज्योतिष के दो पक्ष है। एक खगोलीय गणित व दूसरा फलित । गणितीय पक्ष - भारतीय खगोल ज्ञान विकसित रहा है। आर्यभट्ट - आर्यभट्ट एक भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्हें आम तौर पर भारतीय गण...
आलेख धार्यते इति धर्म: ( अशोक शिरोडे)
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धार्यते इति धर्म: ( अशोक शिरोडे) ___________________ धर्म शब्द का मूल धातु ध है। धर्म की अनेक परिभाषाएं बताई जाती हैं। धर्म, धारण करने को कहते हैं अर्थात जिसे धारण किया जाए वह धर्म है। मनुष्य के रूप में हम जिन बातों को धारण कर सकते हैं वही धर्म है। जैसे सत्य बोलने, दूसरों के लिए प्रेम भाव रखना, जरूरत मंद की सहायता के लिए तत्पर रहना आदि। दूसरा जिस वस्तु, पदार्थ का जो मौलिक गुण है उस गुण का पालन करना उसका धर्म है। जैसे नदी का प्रवाहित रहना, सूर्य का प्रकाशित होना, ऊष्मा देना आदि। वस्तुतः मनुष्य के क्रमशः सामाजिक विकास के साथ उस समूह की एक जैसे रहन सहन की जीवन पद्धति जिसे दीर्घ समय पश्चात संस्कार के रूप में परिभाषित किया जाता है। समाज व राज्य के अवधारणा के साथ ही यह संस्कार धर्म के रूप में स्थापित हो जाता है। तत्पश्चात वेशभूषा, बोली, भाषा सहित अन्य पहचान के चिन्ह को ही सामान्य रूप से धर्म के रूप में लिया जाता है। अर्थात...
प्रेम के राम
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प्रेम करने वाले राम के बदले धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए राम को तुम ही लाये हो कुकृत्यों को तुम्हारे देख जब राम रौद्र हुए तुम बौखलाये हो । मर्यादा पुरुषोत्तम राम को विस्थापित कर युद्ध के लिए आतुर राम को तुमने ही गढ़ा है शोषित पीड़ित जन की व्यथा जान, कुपित राम जन के पथ पर बढ़ा है सड़क से संसद तक राम का यह रूप देख तुम झल्लाये हो। समय आ गया है जब मदमस्त अभिमानी राजा को सिंहासन से उतारा जाएगा मायावी रूप धर ठगता है जो उसका असली रूप दिखाया जाएगा लंका अब ढहायी जाएगी राम का तिलक किया जाएगा, ज्ञान नहीं है तुमको मगर यह दशा तुम ही लाये हो। प्रेम करने वाले राम के बदले धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए राम को तुम ही लाये हो ।। (कृपया इसे राजनीति से न जोड़े।) ( R - राहुल A - अखिलेश M - महुआ )
जुमले वादे
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क्या हुआ तेरा अच्छे दिनों का वादा 15 लाख देने की कसम वो इरादा भूलेगा ये वोटर जिस दिन तुम्हें वो दिन कुर्सी का आखरी दिन होगा याद है मुझको तूने कहा था झोली उठा के चल दूंगा चौकीदार हूं तुम्हारा न खाऊंगा न खाने दूंगा दिल की तरह हाथ मिले हैं कैसे भला छूटेंगे कभी तेरे जुमलों में बीती हर शाम बेवफा क्या ये भी तुझको याद नहीं, ओ कहने वाले दूसरों को फरेबी ये तो बता कौन है फरेबी वो जिसने सवाल किया देश के खातिर ये जिसने देश को बेच दिया नशा दोस्तों की दौलत का ऐसा भी क्या के तुझे कुछ भी याद नहीं , क्या हुआ तेरा अच्छे दिनों का वादा 15 लाख देने की कसम वो इरादा भूलेगा ये वोटर जिस दिन तुम्हें वो दिन कुर्सी का आखरी दिन होगा।।
बच्चे और समय
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समय और बच्चे --------------------------- अपने प्राणों से ज्यादा प्रिय होते हैं अपने बच्चे बच्चों ने जैसा चाहा वैसा ही मां बाप ने किया कभी हाथी कभी घोड़ा बन पीठ पर उसे घुमाया ना ना स्वांग रचा उनका मन बहलाया हाथों को झूला बना उनका मन भरने तक झूला झुलाया बच्चों के साथ बड़े भी बच्चे बन जाते है हंसते - खेलते मस्ती करते उम्र को भूल जाते है और खेल खेल में समय गुजरते देर नहीं लगती बच्चे जब बड़े हो जाते हैं रास्ते उनके अलग हो जाते हैं व्यग्रता व आवेश के वशीभूत हो अपनी सोच समझ को सही मानते है उम्र व अनुभव की आंख उनके नहीं होती न ही दूर तक देखते हैं, माता पिता क्या सोचते हैं क्या चाहते हैं इससे क्या फर्क पड़ता है वक्त का रिवाज है हर मां बाप को यह समय देखना पड़ता है अपनी उम्मीदों को दफन करना पड़ता है।।
अल्कलाइन पानी: भौतिक गुण व स्वास्थ्य लाभ
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🔺अल्कलाइन पानी: भौतिक गुण व स्वास्थ्य लाभ🔺 डॉ. अशोक शिरोडे 9039940034 ---------------------------------- अल्कलाइन वाटर या क्षारीय पानी क्षारीय आयनित पानी (alkaline ionized water) के रूप में भी जाना जाता है। आमतौर पर नेचुरल वाटर का पीएच 6.5 और 8.5 के बीच होता है। अल्कलाइन वाटर कार्बन डाइऑक्साइड-बाइ कार्बोनेट-कार्बोनेट संतुलन प्रणाली द्वारा नियंत्रित किया जाता है। पानी अम्लीय या क्षारीय के गुणवत्ता को ph के रूप परीक्षण किया जाता है। - 1 से 7 ph के बीच का पानी अम्लीय होता है। - 7 ph का पानी न्यूट्रल माना जाता है। - 7 से अधिक ph का पानी क्षारीय (alkaline) होता है। - Ph मापने के मापदंड 1 से 14 तक होता है। पहाड़ों निकलने वाले तेज गति से बहने वाली नदी व झरनों का पानी अम्लीय होता है। इसका ph लगभग 9 होता है। अल्कलाइन व आयनीकृत पानी मे अंतर होता है। घरेलू स्तर पर बनाये अल्कलाइन पानी मे केवल एक गुण क्षारीयता होता है। जबकि पहाड़ों...
कविता 'राम'
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प्रेम करने वाले राम के बदले धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए राम को तुम ही लाये हो कुकृत्यों को तुम्हारे देख जब राम रौद्र हुए तुम बौखलाये हो मर्यादा पुरुषोत्तम राम को विस्थापित कर युद्ध के लिए आतुर राम को तुमने ही गढ़ा है शोषित पीड़ित जन की व्यथा जान, कुपित राम जन के पथ पर बढ़ा है सड़क से संसद तक राम का यह रूप देख तुम झल्लाये हो। समय आ गया है जब मदमस्त अभिमानी राजा को सिंहासन से उतारा जाएगा मायावी रूप धर ठगता है जो उसका असली रूप दिखाया जाएगा लंका अब ढहायी जाएगी राम का तिलक किया जाएगा, ज्ञान नहीं है तुमको मगर यह दशा तुम ही लाये हो। ( R - राहुल A - अखिलेश M - महुआ ) ------------------////----------------- डॉ. अशोक शिरोडे