मानसिक तनाव व निदान

*मानसिक तनाव*
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*तनाव सिर्फ दिमाग में चलने वाला एहसास नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली जैविक प्रतिक्रिया है। जब इंसान लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर लगातार “अलर्ट मोड” में बना रहता है।*

*मानसिक तनाव से शरीर में रासायनिक बदलाव* 

दिल की धड़कन तेज होने लगती है, मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं, पेट की प्रक्रिया बिगड़ सकती है और दिमाग धुंधला महसूस होने लगता है

तनाव होते ही दिमाग इसे "खतरा" मान लेता है और शरीर में पूरा केमिकल अलार्म सिस्टम चालू हो जाता है। इसे Fight-or-Flight रिस्पॉन्स कहते हैं।

*तुरंत होने वाले रासायनिक बदलाव - कुछ सेकंड में*
 1. *एड्रेनालाईन नॉरएड्रेनालाईन*  
2.  - *कहां से*: एड्रिनल ग्रंथि से रिलीज  
   - *असर*: दिल की धड़कन तेज, ब्लड प्रेशर बढ़ना, सांस तेज, मसल्स में खून भेजना, शुगर लेवल बढ़ाना  
   - *मकसद*: तुरंत एनर्जी देना ताकि लड़ो या भागो
 
 2. *कोर्टिसोल*  
   - *कहां से*: एड्रिनल कॉर्टेक्स से, HPA एक्सिस एक्टिव होने पर  
   - *असर*: लिवर से ज्यादा ग्लूकोज बनाना, फैट-प्रोटीन तोड़कर एनर्जी देना, इम्यून सिस्टम दबाना, सूजन रोकना  
   - *मकसद*: लंबे खतरे के लिए एनर्जी बचाकर रखना

 3. *CRH और ACTH*  
   हाइपोथैलेमस CRH छोड़ता है → पिट्यूटरी ACTH छोड़ती है → एड्रिनल कोर्टिसोल बनाती है। यही HPA एक्सिस है।

*लंबे समय तक तनाव रहे तो निम्न प्रभाव पड़ते हैं -
सिस्टम रासायनिक असर शरीर पर प्रभाव
**दिमाग** कोर्टिसोल ज्यादा रहने से हिप्पोकैंपस सिकुड़ता है। सेरोटोनिन, डोपामाइन कम होते हैं भूलना, फोकस कम, चिंता, डिप्रेशन, नींद खराब
**इम्यून सिस्टम** कोर्टिसोल लगातार इम्यून सेल्स दबाता है। साइटोकाइन्स का बैलेंस बिगड़ता है ।  बार-बार बीमार पड़ना, घाव देर से भरना, सूजन बढ़ना आदि।
**पाचन**
एड्रेनालाईन पाचन रोक देता है। कोर्टिसोल भूख बढ़ाता है पेट दर्द, IBS, एसिडिटी, मोटापा, खासकर पेट पर चर्बी

**दिल + नसें** नॉरएड्रेनालाईन से BP हाई। कोर्टिसोल से कोलेस्ट्रॉल, शुगर बढ़ती है हाइपरटेंशन, हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ना

**हार्मोन** कोर्टिसोल टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन, थायरॉइड दबाता है पीरियड्स गड़बड़, लिबिडो कम, थकान, बाल झड़ना
**स्किन + बाल** सूजन बढ़ाने वाले केमिकल रिलीज होते हैं एक्ने, एक्जिमा, सोरायसिस बढ़ना, बाल सफेद/झड़ना आदि।

*तनाव के 3 स्टेज*

1. *Alarm*: एड्रेनालाईन की बाढ़ -  दिल तेज, पसीना, अलर्टनेस  
2. *Resistance*: कोर्टिसोल हावी - शरीर खतरे से लड़ता रहता है पर एनर्जी खत्म होती जाती है  
3. *Exhaustion*: महीनों बाद - कोर्टिसोल भी गिर जाता है → बर्नआउट, थकान, बीमारी

थोड़ा तनाव जरूरी है - 
वही एग्जाम में फोकस कराता है। 
समस्या दीर्घकालिक तनाव (chronic stress) से है जब ये केमिकल अविरल बहते रहते हैं। लगातार तनाव में रहने से, अत्यधिक विचार करते रहने से मस्तिष्क शिथिल( relax) अवस्था मे नहीं जा पाता है। मस्तिष्क के सक्रियता के फलस्वरूप हार्मोन ग्रंथियां भी सक्रिय रहती है। जिससे शरीर की कार्य प्रणाली में प्रभाव पड़ता है। जिसके परिणाम विभिन्न रूपों में देखने को मिलता है।

तनाव कम करने पर शरीर खुद ये केमिकल बैलेंस कर लेता है - गहरी सांस, नींद, एक्सरसाइज, दोस्तों से बात। ये सब कोर्टिसोल गिराते हैं और सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन बढ़ाते हैं।

1920 के दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक Walter Cannon ने Harvard University में “Fight or Flight Response” पर रिसर्च करते हुए बताया कि तनाव के समय शरीर खुद को खतरे से बचाने के लिए तुरंत प्रतिक्रिया देता है। बाद में 1930–1950 के बीच वैज्ञानिक Hans Selye ने तनाव के शरीर पर लंबे असर को विस्तार से समझाया।

वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार बढ़ा हुआ Cortisol हार्मोन नींद, पाचन, याददाश्त और हृदय स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। 
इसलिए तनाव सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक समस्या भी बन सकता है। यही कारण है कि आज Meditation, Exercise और सही नींद को मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में  मानसिक लक्षणों व स्वभाव का अत्यधिक महत्व है। मानसिक लक्षण, अनुभूति, स्वभाव के आधार पर औषधि का चुनाव किया जाता है। अर्थात  रोग एक जैसे होने पर भी उनके मानसिक लक्षण, व्यक्ति की प्रकृति, पसंद नापंसन्द प्रत्येक व्यक्ति की अलग होती है। इसी आधार पर उनकी औषधि भी अलग निर्दिष्ट होती है। इसलिए मानसिक बीमारियों में होमिओपैथी  चिकित्सा अपेक्षाकृत ज्यादा प्रभावी सिद्ध हुई है। 
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         डॉ.अशोक शिरोडे
            बिलासपुर
        दिनांक 22 मई 2026

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