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Showing posts from May, 2026

मानसिक तनाव व निदान

*मानसिक तनाव* -------------------------- *तनाव सिर्फ दिमाग में चलने वाला एहसास नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली जैविक प्रतिक्रिया है। जब इंसान लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर लगातार “अलर्ट मोड” में बना रहता है।* *मानसिक तनाव से शरीर में रासायनिक बदलाव*  दिल की धड़कन तेज होने लगती है, मांसपेशियाँ जकड़ जाती हैं, पेट की प्रक्रिया बिगड़ सकती है और दिमाग धुंधला महसूस होने लगता है तनाव होते ही दिमाग इसे "खतरा" मान लेता है और शरीर में पूरा केमिकल अलार्म सिस्टम चालू हो जाता है। इसे Fight-or-Flight रिस्पॉन्स कहते हैं। *तुरंत होने वाले रासायनिक बदलाव - कुछ सेकंड में*  1. *एड्रेनालाईन नॉरएड्रेनालाईन*   2.  - *कहां से*: एड्रिनल ग्रंथि से रिलीज      - *असर*: दिल की धड़कन तेज, ब्लड प्रेशर बढ़ना, सांस तेज, मसल्स में खून भेजना, शुगर लेवल बढ़ाना      - *मकसद*: तुरंत एनर्जी देना ताकि लड़ो या भागो    2. *कोर्टिसोल*      - *कहां से*: एड्रिनल कॉर्टेक्स से, HPA एक्सिस एक्टिव होने पर   ...

मनुष्यता का बोध

मनुष्यता का बोध ---------------------- ईश्वर ने तुमसे कभी कुछ नहीं मांगा।  न व्रत,न होम,न फल,न फूल।  उसने बस चाहा कि तुम वैसा ही बन जाओ,  जैसे तुम मूलतः थें   निर्मल, सरल, सहज, निर्दोष। ईश्वर किसी देवालय में नहीं रहता है वह तो हर व्यक्ति के मन के अंदर है।  ईश्वर तो हवा, पानी, पेड़-पौधों और हर मनुष्य के भीतर मौजूद हैं।  जब हम यह स्वीकार करते हैं कि सबमें एक ही ईश्वर का अंश है, तो हमारे मन में हर जीव के प्रति प्रेम, करुणा और सम्मान का भाव जागृत होता है।  सिर्फ साँस लेना ही जीवन नहीं है बल्कि किसी और की साँस बन जाना ही असली जीवन है। वो जो स्वार्थ से ऊपर उठे जो “मैं” से आगे बढ़कर “हम” तक पहुँचे वही सच में इंसान है।  मरना यहाँ केवल शरीर का अंत नहीं बल्कि अपने अहंकार छोड़ देना है अपने सुख त्याग देना है किसी और के दर्द को अपना मान लेना है।  जब कोई किसी  दूसरे के आँसू पोंछने के लिए अपने सुखों का त्याग करने को तत्पर हो जाता है वहीं इंसानियत जन्म लेती है। मनुष्य होने  और मनुष्यता का बोध होने में अंतर है। मनुष्यता बोध होते ही वह यांत्रिक ...

नव वर्ष

नए साल में नई पहल हो, कठिन जिंदगी .... सरल हो, नये संकल्प व नए पथ हो  सुखद सबका ... नया साल हो, आगे बढ़ने के प्रयास सबके हर हाल में सदा ..... सफल हो, बिखरे आभा दिनकर की  उत्साह उमंग के.... हर पल हो, विचार-कार्य-परिश्रम का आपके हाथ में ... प्रतिफल हो, समय से सब सधे, काज हो पूरे नव वर्ष में ऐसी .... हलचल हो, विश्व में कहीं भी न युद्ध  हो  वाणी हो मधुर ...नयन सजल हो,  विवाद नहीं आपस मे संवाद हो, मानवता के सवाल सब.... हल हो, मानव मन मे करुणा का वास हो ईर्ष्या - द्वेष का नाश .... समूल हो, आपदा- घृणा रहित हो विश्व  प्रेम-करुणा मन में ....सबल हो, नए साल में  ऐसी नई पहल हो, कठिन जिंदगी  .... सरल हो ।। ------------------------------------------- अशोक शिरोडे 31 दिसंबर 2025

सियासत का मैदान - नफरत का खेल

*सियासत के मैदान में नफरत का खेल* ----------------*----------------- राजनीति का मूल मंत्र है सत्ता और सत्ता तक पहुँचने का सबसे छोटा व आसान रास्ता आज नफरत बन चुका है। जनता को जाती व धर्म के नाम विभाजित कर दो। उन्हें जीवन के मूलभूत सवालों पर सोचने और बात करने का मौका ही मत दो।  जनता को जोड़ना मुश्किल है, लेकिन तोड़ना आसान है।  इसलिए हर चुनाव से पहले एक नया दुश्मन गढ़ा जाता है। कभी मज़हब के नाम पर, कभी जाति के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर।  नफरत का खेल सुनियोजित होता है। सोच समझकर योजनाबध्द रूप से इस षडयंत्र  का जाल बुना जाता है। हर चुनाव के पहले एक डर पैदा किया जाता है। बताया जाता है कि फलां समुदाय तुम्हारी नौकरी खा जाएगा, तुम्हारी संस्कृति मिटा देगा, तुम्हारे बच्चों का भविष्य छीन लेगा। भावनात्मक तौर पर मन मे डर पैदा किया जाता है , डर के बाद गुस्सा आता है। गुस्से के बाद भीड़ बनती है। और भीड़ का कोई विवेक नहीं होता। उसकी कोई दिशा नहीं होती। भीड़ में  एक उबाल आता है। नफरत के बहाव में भीड़ बह जाती है। इस बहाव के आवेश में  बिना सोचे समझे बोलती है, वोट देती है , लड़ती ...