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सियासत का मैदान - नफरत का खेल

*सियासत के मैदान में नफरत का खेल* ----------------*----------------- राजनीति का मूल मंत्र है सत्ता और सत्ता तक पहुँचने का सबसे छोटा व आसान रास्ता आज नफरत बन चुका है। जनता को जाती व धर्म के नाम विभाजित कर दो। उन्हें जीवन के मूलभूत सवालों पर सोचने और बात करने का मौका ही मत दो।  जनता को जोड़ना मुश्किल है, लेकिन तोड़ना आसान है।  इसलिए हर चुनाव से पहले एक नया दुश्मन गढ़ा जाता है। कभी मज़हब के नाम पर, कभी जाति के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर।  नफरत का खेल सुनियोजित होता है। सोच समझकर योजनाबध्द रूप से इस षडयंत्र  का जाल बुना जाता है। हर चुनाव के पहले एक डर पैदा किया जाता है। बताया जाता है कि फलां समुदाय तुम्हारी नौकरी खा जाएगा, तुम्हारी संस्कृति मिटा देगा, तुम्हारे बच्चों का भविष्य छीन लेगा। भावनात्मक तौर पर मन मे डर पैदा किया जाता है , डर के बाद गुस्सा आता है। गुस्से के बाद भीड़ बनती है। और भीड़ का कोई विवेक नहीं होता। उसकी कोई दिशा नहीं होती। भीड़ में  एक उबाल आता है। नफरत के बहाव में भीड़ बह जाती है। इस बहाव के आवेश में  बिना सोचे समझे बोलती है, वोट देती है , लड़ती ...

कवित - सामाजिक मूर्छा का दौर

अजब बदला है राजनीति का मिजाज इस दौर में सच की आवाज कहीं खो गई मन की बात - जुमलों के शोर में धन दौलत की चोरी को सुनते  थे वोट की चोरी होने लगी इस दौर में  मदारी के तमाशे में सब हैं मगन  कोई कुछ न बोले अंधभक्ति के दौर में   राजा और रंक दोनों है अपने मे मस्त सामाजिक मूर्छा के इस विकट दौर में।। - अशोक शिरोडे -     

🔺 पानी-शरीर -स्वास्थ🔺हमें कैसा पानी पीना चाहिए! - (डॉ.अशोक शिरोडे)

🔺 पानी-शरीर -स्वास्थ🔺 हमें कैसा पानी पीना चाहिए!          क्रमशः   ...2 ----------------------------------- हमें पहाड़ो से निकलने वाली नदियों व झरनों के पानी के समान अशुद्धियों से मुक्त,  एंटीऑक्सीडेंट युक्त पतला (सुक्ष्म) , इलेक्टरोलीसिस  की प्रक्रिया से गुजरे हुआ पानी पीना चाहिए क्योंकि यह शरीर को हाइड्रेट रखता है, पाचन में मदद करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। पेयजल की गुणवत्ता के मानकों में रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन पानी शामिल है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित IS 10500:2012 मानक के अनुरूप होता है। हमारे पीने के पानी का pH 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए, गंदलापन कम होना चाहिए, और कुल घुलित ठोस (TDS) 300 mg/L से कम होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पानी में हानिकारक जीवाणु या रसायन नहीं होने चाहिए और उसमें घुली हुई ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित IS 10500:2012 पेयजल के लिए आधिकारिक भारतीय मानक है, जो भारत में पानी की गुणवत्ता को नियंत्रित करता ...

चंद्रग्रहण - एक खगोलीय घटना

चंद्रग्रहण मात्र एक खगोलीय घटना है। ------------------------------------------- जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो वो खगोलीय घटना है..लेकिन हम इंसानों ने इसे धार्मिक तमाशा बना दिया गया है। चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, लेकिन इसके बारे में कई तरह के अंधविश्वास ( Myth) प्रचलित हैं. ग्रहण से जुड़ी ज्यादातर बातें सिर्फ़ परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं. विज्ञान के अनुसार, यह केवल सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की alignment है, जिसका इंसानी स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं या खाने-पीने पर कोई असर नहीं होता है. 🔹 हिंदू धर्म में कहा जाता है कि चंद्रग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए, गर्भवती महिलाएँ बाहर न निकलें, मंत्र-जाप करें..! 🔹 इस्लाम में इसे अल्लाह की निशानी माना गया और सलात-उल-खुसूफ़ (विशेष नमाज़) पढ़ने की परंपरा है..! 🔹 ईसाई धर्म में पहले इसे “ईश्वर का क्रोध” समझा जाता था पर अब वो इस मूर्खता से निकल गए हैं..! 🔹 बौद्ध/जैन परंपराओं में भी ग्रहण को साधना और तपस्या का समय माना जाता है..! लेकिन सच्चाई ये है कि..! न तो खाने में कुछ ज़हरीला हो जाता है..! न गर्भवती महिला और बच्चा खतर...

पानी-शरीर-स्वास्थ मानव शरीर में पानी की भूमिका(डॉ.अशोक शिरोडे)

🔺 पानी - शरीर - स्वास्थ् 🔺 मानव शरीर में पानी की भूमिका ------------------------------------     जल ही जीवन है ऐसा कहा जाता है ,  लेकिन क्यों इस पर कभी गंभीरता से विचार नहीं करते है। एक व्यक्ति 1 सप्ताह तक भोजन के बिना रह सकता है, लेकिन पानी की एक बूंद के बिना 3 दिनों से अधिक नहीं रह सकता है। जैसे ही मानव शरीर में 1% पानी की कमी होती है, उसे प्यास लगने लगती है। 5 प्रतिशत तक की कमी होने पर शरीर की नसें और इसकी सहनशक्ति कम होने लगती है। जब ऐसा होता है, तो शरीर थकावट महसूस करता है। अगर शरीर में पानी का स्तर 10 प्रतिशत तक गिर जाता है, तो व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है। अगर शरीर में पानी की कमी 20 प्रतिशत तक हो जाती है, तो यह इंसान की मौत का कारण भी बन सकता है। यही कारण है कि मनुष्य को हमेशा अपने शरीर को पानी की आपूर्ति करनी चाहिए। अपने स्वास्थ्य में सुधार करना चाहते है तो यह समझना कि पानी आपके शरीर के लिए क्यों आवश्यक है, एक स्वस्थ, अधिक हाइड्रेटेड जीवन की ओर पहला कदम है।  यह पोषक तत्वों और ऑक्सीजन को कोशिकाओं तक पहुँचाता है, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है, ...

परसाई की रचनाएं "सोचना" और "सवाल करना" सिखाती है (डॉ.अशोक शिरोडे)

               परसाई की रचनाएं  "सोचना" और "सवाल करना" सिखाती है -------------------------------------------------       हरिशंकर परसाई का नाम हिंदी साहित्य में व्यंग्य के स्तंभ के रूप में लिया जाता है। उनके लिए 'लोक शिक्षा' का अर्थ केवल स्कूली पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं था, बल्कि यह एक सशक्तिकरण का हथियार था।  हरिशंकर परसाई (1924-1995) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज की कुरीतियों, विसंगतियों और राजनीतिक - सामाजिक भ्रष्टाचार पर तीखे प्रहार किए। उनका मानना था कि सच्ची शिक्षा वह है जो आम जन (लोक) को उनके अधिकारों, सामाजिक विषमताओं और शोषण के तंत्र के प्रति जागरूक करे। उनका लेखन 'लोक शिक्षण' (जनशिक्षा) का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। उनकी रचनाओं ने न केवल पाठकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें सामाजिक सच्चाई से भी रूबरू कराया।   लोक शिक्षा के प्रति विचार परसाई जी ने अपने लेखन को ही लोक शिक्षा का सबसे बड़ा माध्यम बनाया। उनकी रचनाएँ एक कक्षा की तरह हैं जहाँ पाठक समाज का यथार्थ पा...

गांधी - एक वैश्विक व्यक्ति

गांधी - एक वैश्विक व्यक्ति  –----------------------------- गांधी को पूरा विश्व जानता है और मानता है। एक व्यक्ति की अज्ञानता से विश्व अज्ञानी नहीं हो जाएगा।  देश के सभी राज्यों में प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम में महात्मा गांधी को पढ़ाया जाता है। उच्चतर माध्यमिक में तो विस्तृत रूप से पढ़ाया जाता है। अनेक लोगों ने उनके विविध विचार व कार्यो पर शोध किये है, तथा जो आज भी जारी है। दुनिया के लगभग सभी देशों में गांधी की प्रतिमा लगी है, कोई न कोई संस्थान स्थापित किये गए हैं। गांधी के विचार व विस्तृत कार्य पर निरंतर शोध कार्य किया जाता है। आज भी अनेक विद्वान लोग गांधी को विस्तृत आयाम में नए दृष्टिकोण के साथ परिभाषित कर रहे हैं। इंग्लैंड जिसके शासन के खिलाफ  गांधी ने उस दौर में  एकदम नए प्रकार का शांतिमय विरोध आंदोलन असहयोग आंदोलन किए,  उस देश ने भी गांधी के अस्तित्व को स्वीकार किया उनके वैचारिक व व्यवहारिक संघर्ष को सही ठहराते हुए पूरे सम्मान के साथ प्रतिमा स्थापित की है। अफ्रीका में गांधी के संघर्ष ने वहां लोगों को प्रेरित किया, गांधी के अहिंसा के पथ पर चलकर ही नेल...