चंद्रग्रहण - एक खगोलीय घटना
चंद्रग्रहण मात्र एक खगोलीय घटना है।
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जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो वो खगोलीय घटना है..लेकिन हम इंसानों ने इसे धार्मिक तमाशा बना दिया गया है। चंद्र ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, लेकिन इसके बारे में कई तरह के अंधविश्वास ( Myth) प्रचलित हैं.
ग्रहण से जुड़ी ज्यादातर बातें सिर्फ़ परंपरा और मान्यताओं पर आधारित हैं. विज्ञान के अनुसार, यह केवल सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की alignment है, जिसका इंसानी स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं या खाने-पीने पर कोई असर नहीं होता है.
🔹 हिंदू धर्म में कहा जाता है कि चंद्रग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए, गर्भवती महिलाएँ बाहर न निकलें, मंत्र-जाप करें..!
🔹 इस्लाम में इसे अल्लाह की निशानी माना गया और सलात-उल-खुसूफ़ (विशेष नमाज़) पढ़ने की परंपरा है..!
🔹 ईसाई धर्म में पहले इसे “ईश्वर का क्रोध” समझा जाता था पर अब वो इस मूर्खता से निकल गए हैं..!
🔹 बौद्ध/जैन परंपराओं में भी ग्रहण को साधना और तपस्या का समय माना जाता है..!
लेकिन सच्चाई ये है कि..!
न तो खाने में कुछ ज़हरीला हो जाता है..!
न गर्भवती महिला और बच्चा खतरे में होते हैं..!
न कोई देवता गुस्सा होता है..!
ये सब खगोलीय घटना है – जैसे सूरज उगता और डूबता है..!
फर्क सिर्फ इतना है कि उस दिन पृथ्वी का साया चंद्रमा पर पड़ जाता है..!
फिर भी हम इसे “शुभ-अशुभ”, “पाप-पुण्य” और “डर- झूठ” से जोड़कर अपने ही दिमाग पर ग्रहण लगा लेते हैं..!
असली ग्रहण तो हमारी सोच पर है, चंद्रमा पर तो बस पृथ्वी की छाया है। गैलेलियो, कॉपरनिकस , आर्यभट्ट जैसे विद्वानों ने पुरानी मान्यताओं को धवस्त करते हुए पृथ्वी चंद्रमा और सूर्य सहित अन्य ग्रहों के का अध्ययन कर इस बात को प्रमाणित कर दिया कि पृथ्वी सूर्य के चारों घूमती है। चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है और वह पृथ्वी का चक्कर लगाता है।
अतः हम पढ़ लिखकर भी विज्ञान के युग में उन्ही अंधविश्वासों और मान्यताओं को लादकर घूमते रहें तो यह कोई समझदारी वाली बात नहीं है।
आज के युवा को अधिक तार्किक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर विचार करने व तथा उसे जीवन में अपनाने की जरूरत है।
धार्मिक ज्ञान व्यक्ति में उर न समाज मे कोई बदलाव ला सकता है। अन्यथा हम अपने बच्चों को आधुनिक विद्यालय में भेजने की धार्मिक शिक्षा केन्द्रों में भेज रहे होते।
अविद्या अर्थात अज्ञान ही हमारे दुख का कारण है। अतः जीवन के प्रत्येक चरण में सत्य को देखने समझने का दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। मनुष्य समाज के विकास का मार्ग सतत शोधों, अनुसंधानों और प्रयोगों ने प्रशस्त किया है।
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- अशोक शिरोडे
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