गांधी - एक वैश्विक व्यक्ति

गांधी - एक वैश्विक व्यक्ति 
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गांधी को पूरा विश्व जानता है और मानता है। एक व्यक्ति की अज्ञानता से विश्व अज्ञानी नहीं हो जाएगा। 
देश के सभी राज्यों में प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम में महात्मा गांधी को पढ़ाया जाता है। उच्चतर माध्यमिक में तो विस्तृत रूप से पढ़ाया जाता है। अनेक लोगों ने उनके विविध विचार व कार्यो पर शोध किये है, तथा जो आज भी जारी है।
दुनिया के लगभग सभी देशों में गांधी की प्रतिमा लगी है, कोई न कोई संस्थान स्थापित किये गए हैं। गांधी के विचार व विस्तृत कार्य पर निरंतर शोध कार्य किया जाता है। आज भी अनेक विद्वान लोग गांधी को विस्तृत आयाम में नए दृष्टिकोण के साथ परिभाषित कर रहे हैं।
इंग्लैंड जिसके शासन के खिलाफ  गांधी ने उस दौर में  एकदम नए प्रकार का शांतिमय विरोध आंदोलन असहयोग आंदोलन किए,  उस देश ने भी गांधी के अस्तित्व को स्वीकार किया उनके वैचारिक व व्यवहारिक संघर्ष को सही ठहराते हुए पूरे सम्मान के साथ प्रतिमा स्थापित की है। अफ्रीका में गांधी के संघर्ष ने वहां लोगों को प्रेरित किया, गांधी के अहिंसा के पथ पर चलकर ही नेल्सन मंडेला न सफलता प्राप्त की। अमेरिका जहां कभी गांधी गए नहीं , वहां भी गांधी से प्रेरणा पाकर  मार्टिन लूथर किंग जूनियर हुए। अमेरिका में भी उन्हें सम्मान प्राप्त है। 
शायद हमारे प्रधानमंत्री ने शालेय शिक्षा में गांधी को नहीं पढ़ा है। 
प्रधानमंत्री के तौर पर दुनियाभर के देशों में  जाने के बाद और वहां गांधी के सम्मान व स्मरण में स्थापित प्रतिमाओं व संस्थाओं के रहते मोदी जी का यह कहना कि गांधी जी को उन पर केंद्रित फ़िल्म बनने से पहले कोई नहीं जानता था, पूरी तरह हास्यास्पद है। 
मोदी जी द्वारा गांधी को कमतर कर आंकने को सामान्य और हल्के स्तर लिया जाना उचित नहीं है। 
वस्तुतः मोदी जी ने वही कहा जो उन्हें शाखाओं में शिक्षण के रूप में प्राप्त हुआ है। 
वस्तुतः संघ के द्वारा लगातार यह कोशिश विभिन्न रूप में की जाती रही है। उनकी तकलीफ है कि *गांधी जी मरने(हत्या) के बाद भी जीवित है। देश के जनमानस के अंतर्मन में गांधी विराजमान है। गांधी उनके हिन्दू राष्ट्र के पथ में विकराल अवरोध है। जब तक गांधी वैचारिक स्तर पर जनमानस में जीवित रहेंगे तब उनके उद्देश्य पूरे होना जटिल है।* साम्प्रदायिक शक्तियों के खिलाफ गांधी का खड़ा होना साम्प्रदायिक शक्तियों को कमजोर करता है।
इसलिए समय समय पर भाजपा के लोगों द्वारा गांधी के खिलाफ न सिर्फ बोला जाता है बल्कि उनकी तस्वीर पर गोली चलाकर नकली लाल रंग बहाए भी जाते हैं। 
गांधी को खारिज कर, संविधान को भी बदलने की दिशा में 400 पार का नारा देकर  देश को वापस पुराने काल मे ले जाने की उनकी नियत स्पष्ट दिखाई देती है।
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     - डॉ.अशोक शिरोडे-

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