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कविता 'राम'

प्रेम करने वाले राम के बदले  धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए राम को  तुम ही लाये हो  कुकृत्यों को तुम्हारे देख जब राम रौद्र हुए तुम बौखलाये हो   मर्यादा पुरुषोत्तम राम को विस्थापित कर  युद्ध के लिए आतुर राम को तुमने ही गढ़ा है शोषित पीड़ित जन की व्यथा जान, कुपित राम जन के पथ पर बढ़ा है सड़क से संसद तक  राम का यह रूप देख तुम झल्लाये हो। समय आ गया है जब मदमस्त अभिमानी राजा को सिंहासन से उतारा जाएगा मायावी रूप धर ठगता है जो उसका असली रूप दिखाया जाएगा लंका अब ढहायी जाएगी राम का तिलक किया जाएगा, ज्ञान नहीं है तुमको मगर यह दशा तुम ही लाये हो। ( R - राहुल   A - अखिलेश   M - महुआ ) ------------------////-----------------    डॉ. अशोक शिरोडे

चुनाव - आपका एक मत अर्थात आपकी सोच-विचार- अपेक्षा

चुनाव -  आपका एक मत अर्थात  आपकी सोच-विचार- अपेक्षा ------------------------- - चाहे मोदी जी प्रधानमंत्री हो या कोई और, भाजपा कांग्रेस या अन्य दल की सरकार हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।  सवाल है उसकी नीतियों व कार्यक्रम का। सत्ता में जो भी होगा , जिसकी भी सरकार होगी ,  उसकी ही नीति व कार्य  व निर्णयों की समीक्षा की जायेगी। उसके कार्यकाल का आकलन होगा। उसकी नीतियों से आम आदमी के जीवन स्तर में क्या बदलाव हुआ, शिक्षा स्वास्थ्य व रोजगार के अवसर कितने मिले इस पर और अन्य सवाल भी उसी से पूछे जाएंगे।  *लोकतंत्र में संविधान के द्वारा राज्य शासित होता है।सरकार व सत्ता में बैठे लोग  जनता के सेवक होते हैं।व्यक्ति के स्थान पर संविधान महत्वपूर्ण होता है। लोग आएंगे व जाएंगे किंतु देश बना रहेगा। लेकिन यह देश भविष्य में कैसा बना रहेगा, बनेगा, इसका आधार भूत दायित्व वर्तमान पीढ़ी का होता है। यदि वर्तमान पीढ़ी के लोग सरकार के कार्यो व नीतियों की समीक्षा कर सरकार को सही राह दिखाने का काम नहीं करेंगे तो फिर आने वाले समय मे देश की स्थिति विकट हो सकती है। आपको अपने बच्चों को कैसा ...

कविता जन्मदिन की शुभकामनाएं

जन्मदिन की शुभकामनाएं --------------------------------- मेरे प्यारे दोस्त  तुम्हें दे रहा हूं  जन्मदिन की शुभकामनाएं तुम्हें हर कदम पर मिलती रहे  नित नई सफलताएं , जीवन में तुम्हारे  प्यार का न कभी अभाव हो, तुम्हारे अपने हैं सभी सबसे प्रीति बनी रहे अपनत्व रहे - लगाव हो, जीवन यात्रा में  मिले हैं जो साथी वे अब भी तुम्हें हृदय से याद करते हैं, आज तारीख में हर साल तुम्हारा जन्मदिन मनाया करते हैं। तुम सदा खुश रहो यही कामना किया करते हैं।। ----------------------------------------        - अशोक शिरोडे -

कविता - तानाशाह डरपोक होता है

हर मोर्चा लड़ना है ---------------------- यूं तो सभी  किसी न किसी नशे लफड़े में पड़े है नेता अधिकारी सफेदपोश, वर्दीधारी  भ्रष्टाचार के दलदल में पड़े है  उससे बाहर निकलने की  उनकी नहीं है चाहत मंत्री संत्री अपने पदों पर चिपके रहने के फेर में पड़े है सत्ता  के दलाल पूरी ताकत से देश के संस्थान बेचने पर अड़े है देशी अंग्रेज व्यापारी  बाजार कब्जाने में लगे है सियासत साधने सत्ता पाने दिलों में नफरत की ऊंची दीवार उठाने में लगे है सब छोटे या बड़े गड्ढे में पड़े हैं । बस कुछ सिरफिरे लोग हैं जिन्हें नशा है सच कहने सच देखने का जिन्हें नहीं है डर गाड़ी से कुचल दिए जाने का देशद्रोही- आन्दोलनजीवी  या कुछ और कहलाने का जिन्हें फिक्र है देश की  आने वाले नोनिहालो के कल की देश - संविधान  और लोकतंत्र के खातिर कफ़न बांध सर पे  कबीर-गांधी-भगतसिंह  की कठिन राह पर वह चल पड़े है  वे जानते है   लड़ाई मुश्किल है और उन्हें ही  हर मोर्चा लड़ना है  उन्हें अपने होंसलें अपनी जीत का  पूरा यकीन है क्योंकि झूठ फरेब के पैर नहीं होते है दुनिया के ...

कविता - बिटिया की खुशी

बिटिया की खुशी --------------------- बिटिया  जन्म ले जब घर आई  ढेर सारी खुशियां लाई लक्ष्य मिला   जीवन में आस जगी,  बिटिया का  रोना हंसना  घुटनो के बल रेंगना गुड्डे गुड़ियों से खेलना छुपने -  ढूंढने के खेल उसे खेलते देखना अच्छा लगता  मन रम जाता बिटिया पहला कदम जब चली थी  कसकर पकड़ रखा था  पिता की उंगलियों को  उसे पता था  विश्वास था  पापा उसे सम्हाल लेंगे  गिरने नहीं देंगे, बिटिया ने  ककहरा सीखने जब  पहली बार  स्कूल में  रखा था कदम  घबराकर उसने  मजबूती से  पकड़ रखा था पिता की उंगलियों को स्कूल से निकल कर  कॉलेज की समय तक उसने नहीं छोड़ा था  पापा की उंगलियों को जो उसका संबल थी - ताकत  थी एक पल भी  वह न भटकी न ओझल हुआ लक्ष्य उसकी आँखों से एकाग्रचित्त रह सतत अग्रसर रही अपनी तय राहों पे, उसे यह विश्वास था  पिता हर पल  हर मुश्किल में  उसके साथ खड़े हैं, और पिता को बिटिया की समझदारी पर भरोसा था - गर्व था, पता ही नहीं चला  समय पंख लगा  कैसे बीत गय...

संविधान की प्रस्तावना :

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संविधान की प्रस्तावना : पढ़े समझे व पालन करें      -----------------------------------     प्रस्तावना की शुरुआत 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है और 'अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित' पर समाप्त होती है।      जब बात भारत के संविधान की होती है तब इसमें सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आता है प्रस्तावना का क्योंकि यही एक चीज़ है जो कि पूरे संविधान की तस्वीर को बयां करती है । सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक निर्णय में कहा है  "जब भी कभी संविधान में किसी भी प्रकार का संशोधन होगा और अगर वो प्रस्तावना के उद्देश्य को पूरा नहीं करता तो ऐसे संशोधन को शून्य घोषित किया जा सकता है," इसीलिये  कहा गया है कि संविधान की प्रस्तावना पूरे संविधान का आधार है।     स्वतंत्र भारत के संविधान की प्रस्तावना प्रभावी शब्दों की भूमिका से बनी हुई है। इसमें बुनियादी आदर्श, उद्देश्य और भारत के संविधान की अवधारणा शामिल है। ये संवैधानिक प्रावधानों के लिए तर्कसंगतता या निष्पक्षता प्रदान करते हैं। प्रस्तावना में ही वो सब कुछ निहित है जो भारत के सभी व्यक...

कविता - चीता -2

चीता - 2 -------------- कुनो के जंगल  वैसे ही हैं जैसे  देश के दूसरे जंगल हरे भरे ऊंचे पेड़ पेड़ों के पत्तों की आवाजें चहचहाते पक्षी घने झुरमुटों से  छनकर आती धूप इस जंगल में पशु पक्षी वैसे ही रहते है जैसे दूसरे जंगल में , अंतर सिर्फ  इतना ही आया है अपने आगमन पर दिवस को यादगार बनाने मान्यवर ने  काटकर फीते नामीबिया से लाकर छोड़ दिये हैं चीते, जबसे उनो के जंगल मे  विदेशी चीता आया है उस खुशी में उत्सव मनाया गया है सारे जानवर चुप हैं उन्हें अपने  जल जंगल जमीन  छिनने की आहट  सुनाई दे रही है, जिस तरह  खदानों कारखानों के लिए फर्जी ग्रामसभाओं की  सहमति दिखाकर बिना आम सूचना के  जन सुनवाई को दिखाकर आदिवासियों को   उनके पुरखों की विरासत से बेदखल किया जा रहा है,  सत्ता और चीते के बीच  बना यह गठजोड़  उन्हें भी एक दिन बेदखल करेगा प्रतिरोध करने पर  कलबुर्गी , पानसरे,  गौरी लंकेश की तरह  आवाज को  बन्द कर दिया जाएगा ।। --------------------------------- ---- अशोक शिरोडे ----