चुनाव - आपका एक मत अर्थात आपकी सोच-विचार- अपेक्षा

चुनाव -  आपका एक मत
अर्थात 
आपकी सोच-विचार- अपेक्षा
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चाहे मोदी जी प्रधानमंत्री हो या कोई और, भाजपा कांग्रेस या अन्य दल की सरकार हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 
सवाल है उसकी नीतियों व कार्यक्रम का। सत्ता में जो भी होगा , जिसकी भी सरकार होगी ,  उसकी ही नीति व कार्य  व निर्णयों की समीक्षा की जायेगी। उसके कार्यकाल का आकलन होगा। उसकी नीतियों से आम आदमी के जीवन स्तर में क्या बदलाव हुआ, शिक्षा स्वास्थ्य व रोजगार के अवसर कितने मिले इस पर और अन्य सवाल भी उसी से पूछे जाएंगे। 

*लोकतंत्र में संविधान के द्वारा राज्य शासित होता है।सरकार व सत्ता में बैठे लोग  जनता के सेवक होते हैं।व्यक्ति के स्थान पर संविधान महत्वपूर्ण होता है। लोग आएंगे व जाएंगे किंतु देश बना रहेगा। लेकिन यह देश भविष्य में कैसा बना रहेगा, बनेगा, इसका आधार भूत दायित्व वर्तमान पीढ़ी का होता है। यदि वर्तमान पीढ़ी के लोग सरकार के कार्यो व नीतियों की समीक्षा कर सरकार को सही राह दिखाने का काम नहीं करेंगे तो फिर आने वाले समय मे देश की स्थिति विकट हो सकती है। आपको अपने बच्चों को कैसा देश देना है, उनको कैसा भविष्य देना है यह आपके उपर निर्भर है।* 
आपके बच्चों को शिक्षा कितनी सुलभ है, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार ने आम जनता के लिए सुविधा उपलब्ध कराई, रोजगार सृजन के लिए के क्या किया 
जैसे विषय पर चर्चा होनी चाहिए, इस पर विचार होना चाहिए। इस सरकार ने इस के मुद्दों पर क्या कोई नवीन योजना लायी, सार्वजनिक उद्योग, शासकीय उपक्रम शुरू किए? उत्तर मिलेगा नहीं।
हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अतीत में किसकी सरकार ने क्या किया यह विचारणीय नहीं है, वर्तमान सरकार की नीतियों-कार्यों व उपलब्धियों, व गलतियों  पर बात की जाती है, समीक्षा की जाती है।
*देश में किसी भी धर्म के कितने भी धार्मिक स्थल बन जाएं, इससे देश का विशेषकर आपके बच्चों का भविष्य नहीं बनेगा। हम बेहतर जानते हैं कि बच्चों को अच्छी स्तरीय शिक्षा देने पर उनका भविष्य सुरक्षित होगा। उन्हें बदलते समय की जरूरत के अनुसार शिक्षा देनी होगी, तभी उन्हें बेहतर रोजगार प्राप्त हो पायेगा। इसलिए हर व्यक्ति बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास करता है। सब जानते है कि मंदिर मस्जिद गिरजाघर भेजकर उन्हें आज के उन्हें आज के हिसाब से तैयार नहीं किया जा सकता है।*
हमारे सामने 5 साल में एक बार अपना मत अर्थात राय व अपेक्षा बताने, चुनने का अवसर आता है अतः स्पष्ट समझ  के साथ इस अवसर का प्रयोग करना चाहिए।
आज हमारे समक्ष यक्ष प्रश्न है किसको चुने? 
*हमें जाती धर्म की भावनाओं से ऊपर उठकर अपने बच्चों के बेहतर भविष्य, देश में शांति, प्रेम, सदभावना की, स्थापना, लोक कल्याणकारी राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की दिशा में चुनने , राय रखने अवसर है। नफरत के स्थान पर संविधान में निहित स्वतंत्रता, बंधुता,  समता मूलक राज्य के पक्ष में खड़े होने, राय व्यक्त करने का अवसर है।*
देश का इतिहास बताता है जब भी संविधान व लोकतंत्र पर खतरा आया है, देश के लोग लोकतंत्र के पक्ष में मजबूती के साथ खड़े रहे हैं। 
लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाये रखने में जनता की भागीदारी उल्लेखनीय रही है।
*वोट आपका अधिकार है। किसे वोट देना यह आपकी स्वतंत्रता है।* 
संविधान, लोकतंत्र  के पक्ष में, शिक्षा स्वास्थ्य व रोजगार, निजीकरण के विरुद्ध सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने, आगे बढ़ाने के पक्ष में अपना वोट का  प्रयोग करे। 

अंधभक्ति व निष्ठा में अंतर है, अंधविश्वास व विश्वास में अंतर है। 
किसी भी बात का , व्यक्ति का बिना सोचे विचारे, तथ्यों का परीक्षण किए हां में हां मिलाना अंधभक्ति है। 
निष्ठावान व्यक्ति जिसके प्रति निष्ठा रखता है उसके लिए प्रतिबद्ध रहता है किंतु गलत बात, निर्णय में असहमति व्यक्त करता है, जरूरत होने पर विरोध भी व्यक्त करता है। यहां तक गलत कार्यो में साथ भी नहीं देता है।
इसी प्रकार अन्धविश्वास व विश्वास में अंतर है। 
अंधभक्ति व अंधविश्वास में एक बात समान है दोनों में व्यक्ति आंखे बंद कर  अनुगमन करता है। ऐसे व्यक्ति का विवेक शून्य हो जाता है। 

वोट अवश्य दें, 
सोच समझकर अपना प्रतिनिधि चुने
             🙏🙏
- डॉ.अशोक शिरोडे-

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