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कविता "तुम ही कहो"

-  तुम ही कहो - ---------------------- हो रही धीमी धीमी बारिश बह रही मीठी बयार है, तुम ही कहो  तुम्हे किससे प्यार है । आ रही माटी की सोंधी खुशबू पेड़ पौधे खिल उठे रंग बिरंगे फूल  महक रहे है जल थल नभ में मची है हलचल  मौसम के स्वागत में पक्षी चहक रहे है,  वातावरण पूरा हरियाली से आच्छादित है  प्रकृति के आनंद में कण कण आल्हादित है, एक तुम ही हो  जो अकारण मौन हो , सोचो तो सही शायद मुद्दा गौण हो, मन की बात बोलना  बोलते रहना जरूरी है, जिह्वा का व्यायाम  न होने पर वह अचल हो जाएगी एक अंतराल पश्चात नहीं निकलेगा  कंठ से स्वर  फिर तुम  प्यार के गीत कैसे गाओगी-गुनगुनाओगी । ------------------------------------- अशोक शिरोडे

प्रेमचंद: किसान और उसका संघर्ष

प्रेमचंद: किसान और उसका संघर्ष ............................. "न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं। इन्हें वह जैसा चाहती है नचाती है।"      -- मुंशी प्रेमचंद- -------------------------- प्रेमचंद की रचना की भाषा किसान-चेतना और संघर्ष की भाषा है। उन्हें समझौते की भाषा में तनिक विश्वास न था। वे आन्दोलन के दौर के लेखक थे। यह अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ एक व्यापक जनांदोलन का दौर था। प्रेमचंद इस दौर के प्रतिनिधि रचनाकार हैं।  जब 1930 के हिंदुस्तान में जी रहे प्रेमचंद को अपने समय की स्थितियों को समझने और उनके समाधान के लिए साहित्य की आवश्यकता महसूस हुई, तो आज आज़ादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी जबकि परिस्थितियां कमोबेश वहीं हैं, तो साहित्य और समाज के संबंध कैसे कमज़ोर हो सकते हैं? क्योंकि जिस सांप्रदायिक वातावरण, किसानों के शोषण व दयनीय स्थिति, जातिवाद पर अपनी चिंता प्रेमचंद 1930 में ज़ाहिर कर रहे थे, वो माहौल तो आज भी ज्यों-का-त्यों बना हुआ है. भारत में अंग्रेजी साम्राज्यवाद का इतिहास असंतोष और उसके प्रतिकार के लिए विश्व-प्रसिद्ध है। खासकर किसानों एवं मजदूरों के आं...

कविता - मेरा लिखना तुम्हारा समझना

मेरा लिखना तुम्हारा समझना ............................... मैं कुछ लिखता हूं  तुम कुछ पढ़ते हो । मैं कुछ कहता हूं  तुम कुछ समझते हो, मैं बोलता हूं तब तुम चुप रहते हो, मेरी हर बात पर तुम भड़कते हो, सरल से शब्दों के दूजे अर्थ निकालते हो, मैं अ से अपना कहता तुम अनजान समझते हो, मैं क से कबूतर कहता तूम कटार निकालते हो, मैं ख से खुमार कहता तुम खुराफात समझते हो, मैं प से प्यार कहता जब तुम पुरजोर समझते हो, मै ह से हारना कहता जब तुम हिमाकत समझते हो, मैं कुछ भी कहूं अदब से  तुम हर बात पे झगड़ते हो।। मैं कुछ लिखता हूं  तुम कुछ समझते हो । --------------------------------------- - अशोक शिरोडे -

कविता- जुमलों से फैलाते भ्रम

एक देश एक भाषा एक निशान जिये या मरे मजदूर किसान , एक जी एस टी एक बाजार चाहे रहे लाखों युवा बेरोजगार, मंडी समिति खत्म किसान स्वतंत्र नोचने खसोटने साहूकार भी स्वतंत्र,  सरकार कहे आत्मनिर्भर बने चौराहे पर चाय बेचें  या पकोड़े तलें , स्वदेशी बिन बजा बेच डाले सारे सार्वजनिक उपक्रम नित नए जुमलों से जन मन में  फैलाते हैं भ्रम ।। ------------------------ अशोक शिरोडे

कोरोना

कोरोना काल मे जरूरी है धैर्य, साहस, सावधानी व उपचार (डॉ. अशोक शिरोडे) -------------------------------------------       कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से संक्रमित होने वाले लोगो की संख्या काफी अधिक है। प्रदेश व देश में  प्रतिदिन मरीज की संख्या बढ़ रही है, किन्तु दूसरा सच यह भी है कि बड़ी संख्या में लोग ठीक भी हो रहे है।      ध्यान रखिये सर्दी जुकाम होना एक सामान्य सी बात है। फ्लू, इंफ्यूएंजा, वायरल बुखार में भी सर्दी जुकाम  होता है। अतः यह समझने की जरूरत है कि हर सर्दी, जुकाम, बुखार, कोरोना बीमारी नही है। यदपि यह सही है कि कोरोना के मरीज को सर्दी होती है, लेकिन अनेक रोगियो में सर्दी जुकाम नही भी होता है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति में विशेषकर सूखा जुकाम व खांसी पाई जाती है। किंतु अभी के कुछ मरीजों में बिना लक्षण के भी कोरोना पाया गया  है। नए लक्षण में दस्त भी होना पाया गया है। मुंह मे स्वाद व नाक से गंध न आना एक विशेष लक्षण है किंतु ऐसा अक्सर सामान्य सर्दी जुकाम में भी होता है।  अर्थात हर सर्दी जुकाम या बुखार कोरोना की बीमारी नहीं है।  ...

कविता - प्यार तो वही है

*प्यार तो वही है* ------------------- दिन वर्ष माह समय पर समय  व्यतीत हो रहा मेरे और तुम्हारे संबंध पहले से  अब भी वही हैं अंशभर भी ऊर्जा  स्नेह - विश्वास की  कमी उसमें नहीं है , परिस्थितिवश  हो गई है दूरी समय की है ये अपनी लाचारी दिल की दूरियां फिर भी लेशमात्र न बढी मन से मन की  नजदीकियां  अब भी वही है, पत्रों का आना  संदेशों के आदान प्रदान नहीं होता अब इसका अर्थ प्यार की तीव्रता का  कम होना नहीं है माना तुम्हारे और मेरे बीच संवाद संपर्क नहीं है, प्रिय फिर भी अपना प्यार तो वही है जो  अंतर्मन में छुपा कहीं है और मन की दृढ़ता - समर्पण उमंग - विश्वास  पहले सा अब भी वही है ।। -----------------------------   - *अशोक शिरोडे* -

शहीद भगत सिंह व क्रांतिकारी कवि पाश

शहीद भगत सिंह व क्रांतिकारी कवि पाश दोनों की चिन्तन में रहा सर्वहारा वर्ग   -------------------------------------------------- "मेरी भावनाएं मेरी कलम से इस तरह रूबरू है अगर मैं इश्क लिखना चाहूं तो हमेशा इंकलाब लिखा जाता है।" व्यक्ति को कुचलकर मार सकते हैं लेकिन उसके विचारों को नहीं मार सकते।"                       - भगत सिंह सबसे खतरनाक होता है/ सपनों का मर जाना / न होना दर्द का / सब कुछ सहन कर जाना / सबसे खतरनाक वे आंखे होती है/ जो सबकुछ देखते हुए भी जमा हुआ बर्फ होती है।"              - अवतार सिंह संधू "पाश" 23 मार्च शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का शहादत दिवस है। इन तीन नौजवान क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फांसी दी थी। इस घटना के 57 साल बाद 23 मार्च 1988 को पंजाब के प्रसिद्ध क्रांतिकारी कवि अवतार सिहं "पाश" को आतंकवादियों ने अपनी गोलियों का निशाना बनाया। 1970 वाले दशक में पंजाब में जो क्रांतिेकारी आंदोलन शुरू हुआ, उसके पक्ष में कविताएं लिखने के कारण भी पाश कई बार जेल गये थे, सरकारी...