कविता - मेरा लिखना तुम्हारा समझना
मेरा लिखना तुम्हारा समझना
...............................
मैं कुछ लिखता हूं
तुम कुछ पढ़ते हो ।
मैं कुछ कहता हूं
तुम कुछ समझते हो,
मैं बोलता हूं तब
तुम चुप रहते हो,
मेरी हर बात पर
तुम भड़कते हो,
सरल से शब्दों के
दूजे अर्थ निकालते हो,
मैं अ से अपना कहता
तुम अनजान समझते हो,
मैं क से कबूतर कहता
तूम कटार निकालते हो,
मैं ख से खुमार कहता
तुम खुराफात समझते हो,
मैं प से प्यार कहता जब
तुम पुरजोर समझते हो,
मै ह से हारना कहता जब
तुम हिमाकत समझते हो,
मैं कुछ भी कहूं अदब से
तुम हर बात पे झगड़ते हो।।
मैं कुछ लिखता हूं
तुम कुछ समझते हो ।
---------------------------------------
- अशोक शिरोडे -
Comments
Post a Comment