परसाई की रचनाएं "सोचना" और "सवाल करना" सिखाती है ------------------------------------------------- हरिशंकर परसाई का नाम हिंदी साहित्य में व्यंग्य के स्तंभ के रूप में लिया जाता है। उनके लिए 'लोक शिक्षा' का अर्थ केवल स्कूली पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं था, बल्कि यह एक सशक्तिकरण का हथियार था। हरिशंकर परसाई (1924-1995) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज की कुरीतियों, विसंगतियों और राजनीतिक - सामाजिक भ्रष्टाचार पर तीखे प्रहार किए। उनका मानना था कि सच्ची शिक्षा वह है जो आम जन (लोक) को उनके अधिकारों, सामाजिक विषमताओं और शोषण के तंत्र के प्रति जागरूक करे। उनका लेखन 'लोक शिक्षण' (जनशिक्षा) का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। उनकी रचनाओं ने न केवल पाठकों का मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें सामाजिक सच्चाई से भी रूबरू कराया। लोक शिक्षा के प्रति विचार परसाई जी ने अपने लेखन को ही लोक शिक्षा का सबसे बड़ा माध्यम बनाया। उनकी रचनाएँ एक कक्षा की तरह हैं जहाँ पाठक समाज का यथार्थ पा...
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