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Showing posts from September, 2020

कविता - सेवक उद्दंड हो रहा

        सेवक उद्दंड हो रहा       --------------------------- अखंड राष्ट्र आज खंड खंड हो रहा शहीदों का स्वप्न खंड खंड हो रहा।। मूढ़ थामे बागडोर हाँके चाहे जिधर सत्ता लोलुपों का ताल मृदंग हो रहा।। स्...

कविता - अकेला बिंदु

  अकेला बिंदु ---------------------- अबोध शिशु द्वारा स्लेट पर उकेरा गया एक बिंदु , जीवन के वृहद केनवास पर किसी दक्ष कलाकार की तूलिका से बना अकेला बिंदु, अपने होने का अपने अस्तित्व का अहसास दि...

कविता - ब्लेक होल- बिंदु

ब्लेक होल-बिंदु ----------- बिंदु एक नाम है या कागज पर अंकित एक चिन्ह जिसका नहीं मिलता कोई सिरा न कोई प्रारंभ और न कोई अंत जिसमें छुपे हैं रहस्य अनंत अंतरिक्ष के ब्लेक होल की तरह जो आ...

कविता - स्थिर बिंदु

स्थिर बिंदु ------------- स्थिर है बिंदु गतिशील नहीं है वह न ही उसमें से निकली सीधी सरल या कोई वक्र रेखा स्थिर है वह अपनी जगह। प्रयत्न भी किए कुछ लोगों ने उसे हिलाने के जीवन के विविध रं...

कविता - धरा का अस्तित्व

धरा का अस्तित्व ---------------------- प्रकृति की विविधता से भरी यह धरा जिसमें कल कल बहती नदियां अनंत महासागर गगन छूते शिखर हैं, नीर निराले पेड़ पौधे नभ में विचरण करते रंग बिरंगे पंछी, जलचर-थलचर प्राणियों का वास है, विविध ऋतुएं दिन रात का चक्र अपने अक्ष पर कुछ अंश झुकी वक्र, यह धरा जिसमें जीवन है मनुष्य के लिए बहुमूल्य  है, और सोचो तो अनंत अंतरिक्ष में विशाल ग्रहों अनगिनत तारों के समक्ष धरा का अस्तित्व सूक्ष्म बिंदु के तुल्य है।। ------------------------------ - अशोक शिरोडे -