कविता - स्थिर बिंदु
स्थिर बिंदु
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स्थिर है बिंदु
गतिशील नहीं है वह
न ही उसमें से निकली
सीधी सरल
या कोई वक्र रेखा
स्थिर है वह अपनी जगह।
प्रयत्न भी किए
कुछ लोगों ने
उसे हिलाने के
जीवन के
विविध रंगों की
चलती दुनिया में
उसे मिलाने के
किन्तु वह
तनिक सा भी न हिला
अपनी कुंठा - निराशा
अपने भ्रम में
हर बार वह
और गहरे उतर जाता
हिलते ही
एक कदम बढ़ाते ही
उसे
स्वयं के खोने का भय है
स्थिरता में उसे
जीवन दिखता है
इसलिये
स्थिर है वह अपनी जगह ।।
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- अशोक शिरोडे -
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