कविता कंगाल सरकार

कंगाल सरकार
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हम प्रवासी मजदूर
लॉक डाउन में
पड़े हैं जहाँ-तहाँ
मदद की है दरकार
खाने रहने का
नहीं कोई ठिकाना
मालिकों ने बेदर्दी से
किया है निकाल बाहर
उस पर गरीबों पे
पड़ रही दोहरी मार
घर जाने का हुजूर
मांग रहे किराया
क्या कंगाल है सरकार !

        /अशोक शिरोडे/

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