इतिहास के पन्नों पर --------------------------- समय चक्र अपनी धुरी पर घूम आया फिर वहीं नई सदी में फिर पैदा हुआ पृथ्वी पर एक तानाशाह फिर आया हिटलर नाजीवाद और फासीवाद का वह दौर जिसे भुलाने की कोशिश पूरी दुनिया एक अरसे से कर रही मानवता के माथे पर लगा कलंक का धब्बा जहां मौत तांडव करती, मानवता बिलखती आत्मा चीत्कार कर उठती नैतिकता है दम तोड़ती, युद्ध का उन्मांद लाशों का ढेर मांस लोथड़ों की सड़ांध नथुनों में घुसती लाशों पर बैठ क्रूर पाशविकता के पुजारी अपनी कामयाबी के हैं जहां दम भरते इतिहास के पन्नों पर .......।। *अशोक शिरोडे