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Showing posts from April, 2020

कविता- बचा रहे मनुष्य

कोरोना का वायरस नहीं देख रहा जाति-धर्म या देश अमीर-गरीब की रेखा खान-पान, रंग-रूप कद -काठी या भेष, काश संक्रमण में नष्ट हो जाए सब असमानता भेद संघर्ष के अंत में मात्र बचा रहे मनु...

कविता - शायद शत्रु डर जाए

शायद शत्रु डर जाए      (अशोक शिरोडे) ------------------------- हमने नहीं बांधे तोरणद्वार अपने घर के द्वार हमने नहीं बनायी पथ पर कतार हमने नहीं थामे हाथों रंग बिरंगे पुष्प-गुच्छ हार हमने नहीं ग...

दिए के पीछे के प्रश्न और छुपे सच

    प्रकाश के पीछे की मंशा              (अशोक शिरोडे) ------------------------------------------       हमारे प्रधानमंत्री के निर्देश है कि "हमें प्रकाश के तेज को चारों तरफ फैलाना है"।   इसी का पालन करते हुए आज रा...

कोरोना की चुनोती

▪कोरोना की चुनोती▪              (अशोक शिरोडे) ---------------------------- कोरोना के डर से दुबके है घर में, बिना कर्फ्यू के सन्नाटा पसरा है शहर में  । कोरोना कितना बलशाली साबित हुआ भयभीत इंसान बोन...