कविता- बचा रहे मनुष्य
कोरोना का वायरस
नहीं देख रहा
जाति-धर्म या देश
अमीर-गरीब की रेखा
खान-पान, रंग-रूप
कद -काठी या भेष,
काश संक्रमण में
नष्ट हो जाए सब
असमानता भेद
संघर्ष के अंत में
मात्र बचा रहे
मनुष्य ही शेष ।।
-- अशोक शिरोडे
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