कविता - चीता

चीता 
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    चीता  
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जंगल का 
जानवर है चीता
वह नहीं पढ़ता
बाईबल - कुरान
पोथी पुराण या गीता

उसका एक ही धर्म है
शिकार के पीछे
फुर्ती के साथ 
तेज गति से दौड़ना 
पलक झपकते
शिकार को
गरदन से दबोचना 
बचने भागने का 
मौका दिए बिना
काम तमाम करना
.....
फिर इत्मिनान से 
अपनी फुर्ती, अपनी गति 
अपनी सफलता पर
हौले से मुस्कराते
'मन की बात' करना ।।

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    अशोक शिरोडे

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