कविता - नववर्ष
नववर्ष
जिंदगी .. सरल हो
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नए साल में नई पहल हो,
कठिन जिंदगी .... सरल हो,
सदा चले समय के साथ जो,
आगे जा कर..... सफल हो,
बिखरे आभा दिनकर की ,
उत्साह उमंग के.... हर पल हो,
विचार-कार्य-परिश्रम का
आपके हाथ में ... प्रतिफल हो,
समय से सब सधे, काज हो पूरे
नव वर्ष में ऐसी .... हलचल हो,
सुलझ न सकी जो पहेली,
उसका भी अब .... हल हो,
प्रतिबंध से मानव हो मुक्त
कोरोना का नाश .... समूल हो,
आपदा- घृणा रहित हो विश्व
प्रेम-करुणा मन में ....सबल हो,
नए साल में नई पहल हो,
कठिन जिंदगी .... सरल हो ।।
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- अशोक शिरोडे -
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