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Showing posts from July, 2021

प्रेमचंद: किसान और उसका संघर्ष

प्रेमचंद: किसान और उसका संघर्ष ............................. "न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं। इन्हें वह जैसा चाहती है नचाती है।"      -- मुंशी प्रेमचंद- -------------------------- प्रेमचंद की रचना की भाषा किसान-चेतना और संघर्ष की भाषा है। उन्हें समझौते की भाषा में तनिक विश्वास न था। वे आन्दोलन के दौर के लेखक थे। यह अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ एक व्यापक जनांदोलन का दौर था। प्रेमचंद इस दौर के प्रतिनिधि रचनाकार हैं।  जब 1930 के हिंदुस्तान में जी रहे प्रेमचंद को अपने समय की स्थितियों को समझने और उनके समाधान के लिए साहित्य की आवश्यकता महसूस हुई, तो आज आज़ादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी जबकि परिस्थितियां कमोबेश वहीं हैं, तो साहित्य और समाज के संबंध कैसे कमज़ोर हो सकते हैं? क्योंकि जिस सांप्रदायिक वातावरण, किसानों के शोषण व दयनीय स्थिति, जातिवाद पर अपनी चिंता प्रेमचंद 1930 में ज़ाहिर कर रहे थे, वो माहौल तो आज भी ज्यों-का-त्यों बना हुआ है. भारत में अंग्रेजी साम्राज्यवाद का इतिहास असंतोष और उसके प्रतिकार के लिए विश्व-प्रसिद्ध है। खासकर किसानों एवं मजदूरों के आं...

कविता - मेरा लिखना तुम्हारा समझना

मेरा लिखना तुम्हारा समझना ............................... मैं कुछ लिखता हूं  तुम कुछ पढ़ते हो । मैं कुछ कहता हूं  तुम कुछ समझते हो, मैं बोलता हूं तब तुम चुप रहते हो, मेरी हर बात पर तुम भड़कते हो, सरल से शब्दों के दूजे अर्थ निकालते हो, मैं अ से अपना कहता तुम अनजान समझते हो, मैं क से कबूतर कहता तूम कटार निकालते हो, मैं ख से खुमार कहता तुम खुराफात समझते हो, मैं प से प्यार कहता जब तुम पुरजोर समझते हो, मै ह से हारना कहता जब तुम हिमाकत समझते हो, मैं कुछ भी कहूं अदब से  तुम हर बात पे झगड़ते हो।। मैं कुछ लिखता हूं  तुम कुछ समझते हो । --------------------------------------- - अशोक शिरोडे -

कविता- जुमलों से फैलाते भ्रम

एक देश एक भाषा एक निशान जिये या मरे मजदूर किसान , एक जी एस टी एक बाजार चाहे रहे लाखों युवा बेरोजगार, मंडी समिति खत्म किसान स्वतंत्र नोचने खसोटने साहूकार भी स्वतंत्र,  सरकार कहे आत्मनिर्भर बने चौराहे पर चाय बेचें  या पकोड़े तलें , स्वदेशी बिन बजा बेच डाले सारे सार्वजनिक उपक्रम नित नए जुमलों से जन मन में  फैलाते हैं भ्रम ।। ------------------------ अशोक शिरोडे