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Showing posts from October, 2020

मराठी कविता : तरुण बदलतात जगाला

तरुण बदलतात जगाला ------------------------------ तरुणानां काळा सोबत चालू द्या आपल्या भोवती आपणच मांडलेली कुंद करणारी सीमा/बंधन सहर्ष तोडून नव-शक्ति ला समाज/विचार परिवर्तन करू द्या आपण थांबलो आपापल्या वर्तुळात जग वा-याच्या वेगाने बदलत असतं तरुण वेळाच्या गति ने वेळा सोबत धावतात इतिहास दाखवतो क्रांति तरूणच करतात उन्नति चे नवीन संकल्पना नवे विचार नवी दिशा नवे लक्ष्य सतत शोधतात सफलते चे कीर्तिमान रचतात आणि बदलतात                                  समाज आणि  जगाला ।। ----------------------- अशोक शिरोडे

कविता - प्यार तो वही है

प्यार तो वही है ------------------- दिन वर्ष माह समय पर समय व्यतीत हो रहा मेरे और तुम्हारे संबंध पहले से अब भी वही हैं अंशभर भी ऊर्जा स्नेह - विश्वास की कमी उसमें नहीं है , परिस्थितिवश हो गई है दूरी समय की है ये अपनी लाचारी दिल की दूरियां फिर भी लेशमात्र न बढी मन से मन की नजदीकियां अब भी वही है, पत्रों का आना संदेशों का आदान प्रदान नहीं होता अब इसका अर्थ प्यार की तीव्रता का कम होना नहीं है माना तुम्हारे और मेरे बीच संवाद संपर्क नहीं है, प्रिय फिर भी अपना प्यार तो वही है जो अंतर्मन में छुपा कहीं है और मन की दृढ़ता - समर्पण उमंग - विश्वास पहले सा अब भी वही है ।।

कविता - तुम्हारी प्रतीक्षा में

प्रियतमा के लिए मेरी कवितामय भावना तुम्हारी प्रतीक्षा में --------------------------- तेरा और मेरा मकसद एक ही था तेरा और मेरा लक्ष्य एक  ही था उस तक तक पहुंचने के तमाम रास्ते - कच्चे-पक्के, पथरील...

कविता - एक देश एक भाषा

एक देश एक भाषा एक निशान जिये या मरे मजदूर किसान , एक जी एस टी एक बाजार चाहे रहे लाखों युवा बेरोजगार, मंडी समिति खत्म किसान स्वतंत्र नोचने खसोटने साहूकार भी स्वतंत्र, सरकार कहे आत्मनिर्भर बने चौराहे पर चाय बेचें या पकोड़े तलें , स्वदेशी बिन बजा बेच डाले सारे सार्वजनिक उपक्रम नित नए जुमलों से जन मन में फैलाते हैं भ्रम ।। ----------------------------- - अशोक शिरोडे -

कविता - अकेले

ख्वाबों की कश्ती सच के दरिया में एकाएक डूब गई दो दिलों के बीच बनी थी तरंग जो अधबीच टूट गई दरिया ठहरा है और हवाऐं खामोश कहीं कोई हलचल नहीं अब कोई रास्ता अब कोई मंजिल नहीं दोस्...