प्रेमचंद जयंती पर स्मरण
कविता - प्रेमचंद
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18 उपन्यास 300 कहानियां - नाटक
प्रेमचंद की अनमोल धरोहर है,
मुम्बई को आजमाया इलाहाबाद ही भाया
लमहीग्राम उनकी जन्मभूमि रही ।।
ज्ञान से रहा सदा उनका नाता,
लेखन ही उनकी प्रिय कर्मभूमि रही।।
उनकी सांसो में रही माटी की खुशबू ,
ग्रामीण जन जीवन रंगभूमि रही।।
प्रतिज्ञा, निर्मलाहो या गोदान- गबन,
पूस की रात, ईदगाह हो या कफन ,
नमक का दरोगा या दो बैलो की कथा,
शतरंज के खिलाड़ी हो या सेवा सदन।।
ठाकुर का कुंआ, घसवाली या रामलीला,
पंचो के मुंह से परमेश्वर है बोलता।।
जाति, धर्म, ऊंच-नीच, छुआ - छूत,
शोषण के हैं शस्त्र ये है राज खोलता।।
हिंदी साहित्य को मौलिक कहानी दी,
वंचितों के विरोध को मुखर वाणी दी।।
ऐसे कहानीकार जननायक को
लोक करते नित स्मरण है।।
कहानियों में अमर रहेंगे सदा
प्रेमचंद जी को हमारा नमन है।।
-*जूही शिरोडे*-
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