जुमले वादे
क्या हुआ तेरा अच्छे दिनों का वादा 15 लाख देने की कसम वो इरादा भूलेगा ये वोटर जिस दिन तुम्हें वो दिन कुर्सी का आखरी दिन होगा याद है मुझको तूने कहा था झोली उठा के चल दूंगा चौकीदार हूं तुम्हारा न खाऊंगा न खाने दूंगा दिल की तरह हाथ मिले हैं कैसे भला छूटेंगे कभी तेरे जुमलों में बीती हर शाम बेवफा क्या ये भी तुझको याद नहीं, ओ कहने वाले दूसरों को फरेबी ये तो बता कौन है फरेबी वो जिसने सवाल किया देश के खातिर ये जिसने देश को बेच दिया नशा दोस्तों की दौलत का ऐसा भी क्या के तुझे कुछ भी याद नहीं , क्या हुआ तेरा अच्छे दिनों का वादा 15 लाख देने की कसम वो इरादा भूलेगा ये वोटर जिस दिन तुम्हें वो दिन कुर्सी का आखरी दिन होगा।।