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संविधान की प्रस्तावना :

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संविधान की प्रस्तावना : पढ़े समझे व पालन करें      -----------------------------------     प्रस्तावना की शुरुआत 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है और 'अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित' पर समाप्त होती है।      जब बात भारत के संविधान की होती है तब इसमें सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण पक्ष आता है प्रस्तावना का क्योंकि यही एक चीज़ है जो कि पूरे संविधान की तस्वीर को बयां करती है । सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक निर्णय में कहा है  "जब भी कभी संविधान में किसी भी प्रकार का संशोधन होगा और अगर वो प्रस्तावना के उद्देश्य को पूरा नहीं करता तो ऐसे संशोधन को शून्य घोषित किया जा सकता है," इसीलिये  कहा गया है कि संविधान की प्रस्तावना पूरे संविधान का आधार है।     स्वतंत्र भारत के संविधान की प्रस्तावना प्रभावी शब्दों की भूमिका से बनी हुई है। इसमें बुनियादी आदर्श, उद्देश्य और भारत के संविधान की अवधारणा शामिल है। ये संवैधानिक प्रावधानों के लिए तर्कसंगतता या निष्पक्षता प्रदान करते हैं। प्रस्तावना में ही वो सब कुछ निहित है जो भारत के सभी व्यक...

कविता - चीता -2

चीता - 2 -------------- कुनो के जंगल  वैसे ही हैं जैसे  देश के दूसरे जंगल हरे भरे ऊंचे पेड़ पेड़ों के पत्तों की आवाजें चहचहाते पक्षी घने झुरमुटों से  छनकर आती धूप इस जंगल में पशु पक्षी वैसे ही रहते है जैसे दूसरे जंगल में , अंतर सिर्फ  इतना ही आया है अपने आगमन पर दिवस को यादगार बनाने मान्यवर ने  काटकर फीते नामीबिया से लाकर छोड़ दिये हैं चीते, जबसे उनो के जंगल मे  विदेशी चीता आया है उस खुशी में उत्सव मनाया गया है सारे जानवर चुप हैं उन्हें अपने  जल जंगल जमीन  छिनने की आहट  सुनाई दे रही है, जिस तरह  खदानों कारखानों के लिए फर्जी ग्रामसभाओं की  सहमति दिखाकर बिना आम सूचना के  जन सुनवाई को दिखाकर आदिवासियों को   उनके पुरखों की विरासत से बेदखल किया जा रहा है,  सत्ता और चीते के बीच  बना यह गठजोड़  उन्हें भी एक दिन बेदखल करेगा प्रतिरोध करने पर  कलबुर्गी , पानसरे,  गौरी लंकेश की तरह  आवाज को  बन्द कर दिया जाएगा ।। --------------------------------- ---- अशोक शिरोडे ----