Posts

Showing posts from February, 2025

ज्योतिष का आधार ही त्रुटिपूर्ण -

ज्योतिष - आधार ही त्रुटिपूर्ण        - डॉ. अशोक शिरोडे ---------------------------------- *प्रसिद्ध लेखक गुणाकर मूले की पुस्तक "ज्योतिष विकास प्रकार और ज्योतिर्विद"* आज के समसामयिक अंवधविश्वासी युग में मील का पत्थर है, जब हमें 21 वीं सदी में तार्किकता वैज्ञानिकता की ओर अग्रसर होना चाहिए तो अधिकांश मध्यवर्ग आज फलित ज्योतिष की घनघोर अंधविश्वास में आकंठ डूबा हुआ है!  भारत ही नहीं अपितु विश्व के तमाम देशों का  उच्च शिक्षित तबका और मध्य वर्ग फलित ज्योतिष और ज्योतिर्विदों के प्रभाव में है। गुणाकर मूले की यह किताब फलित ज्योतिष के पूरे फलसफे और सिद्धांत की पोल खोलती है और फलित ज्योतिष को एक सिरे से खारिज करते हुए इसे पूर्णतया अंधविश्वास पर आधारित छल बताती है। इसी विषय मेरे विचार- मैं ज्योतिष का विशेषज्ञ व्यक्ति नहीं हूं। ज्योतिष के विषय में सामान्य जानकारी रखता हूं।  मेरी समझ से ज्योतिष के दो पक्ष है। एक खगोलीय गणित व दूसरा फलित । गणितीय पक्ष - भारतीय खगोल ज्ञान विकसित रहा है। आर्यभट्ट - आर्यभट्ट एक भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्हें आम तौर पर भारतीय गण...

आलेख धार्यते इति धर्म: ( अशोक शिरोडे)

धार्यते इति धर्म:                    ( अशोक शिरोडे) ___________________                धर्म शब्द का मूल धातु ध है।  धर्म की अनेक परिभाषाएं बताई जाती हैं।  धर्म, धारण करने को कहते हैं अर्थात जिसे धारण किया जाए वह धर्म है।   मनुष्य के रूप में हम जिन बातों को धारण कर सकते हैं वही धर्म है। जैसे सत्य बोलने, दूसरों के लिए प्रेम भाव रखना,    जरूरत मंद की सहायता के लिए तत्पर रहना आदि। दूसरा जिस वस्तु,  पदार्थ का जो मौलिक गुण है उस गुण का पालन करना उसका धर्म है। जैसे नदी का प्रवाहित रहना, सूर्य का प्रकाशित होना, ऊष्मा देना आदि। वस्तुतः मनुष्य के क्रमशः सामाजिक विकास के साथ उस समूह की एक जैसे रहन सहन की जीवन पद्धति जिसे दीर्घ समय पश्चात संस्कार के रूप में परिभाषित किया जाता है। समाज व राज्य के अवधारणा के साथ ही यह संस्कार धर्म के रूप में स्थापित हो जाता है। तत्पश्चात  वेशभूषा, बोली, भाषा सहित अन्य पहचान के चिन्ह को ही सामान्य रूप से धर्म के रूप में लिया जाता है। अर्थात...