कोरोना में मधुशाला
कविता: कोरोना में मधुशाला कोरोना में मधुशाला ------------- कोरोना काल मे ... बंद है पाठशाला भीड़ भारी है यहां ... खुली है मधुशाला, पीने पिलाने की ... अब क्या बात करें हाथ धुला रही ... कमबख्त मधुशाला, मंदिर मस्जिद के ... बंद रहे कपाट आबाद होती रही ... नित मधुशाला, न ख़ुशी गम की ... न गम खुशी का दिल को देती दिलासा ... एक मधुशाला, क्या बताये हाल ... मत करो सवाल नए रंग दिखाती ... यह मधुशाला, झगड़े-भेद मिटाती ... अपनो से मिलाती दिल के तार जोड़ती ... एक मधुशाला, देशी हो या विदेशी ... सरूर में कमी नहीं दवा का काम करती ... मस्त मधुशाला ।। ------------------------------- अशोक शिरोडे