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कर्मयोगी राष्ट्रसंत गाडगे बाबा - अशोक शिरोडे -

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कर्मयोगी राष्ट्रसंत गाडगे बाबा               - अशोक शिरोडे - --------------------------------------------------- वे कहते थे, “मंदिर न जाएं, मूर्तियों की पूजा न करें, सावकार ( साहूकार)से कर्जा न लें, अशिक्षित न रहे, पोथी-पुराण, मंत्र-तंत्र, देव-देवकी, चमत्कार जैसी बातों पर विश्वास न करें।” उन्होंने जीवन भर लोगों को यही सिखाया। ---------------------------------------------------- गाडगे बाबा का वास्तविक नाम देबूजी झिंगारजी जानोरकर था. महाराज का जन्म 23 फरवरी, 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अंजनगांव सुरजी तालुका के  शेणगांव   ग्राम में एक धोबी परिवार में हुआ था. गाडगे महाराज एक घूमते फिरते सामाजिक शिक्षक थे. वे पैरों में फटी हुई चप्पल और सिर पर मिट्टी का कटोरा ढककर पैदल ही यात्रा किया करते थे और यही उनकी पहचान थी. जब वे किसी गांव में प्रवेश करते थे तो गाडगे महाराज तुरंत ही गटर और रास्तों को साफ़ करने लगते और काम खत्म होने के बाद वे खुद लोगों को गांव के साफ़ होने की बधाई भी देते थे.       यद्यपि बाब...